संजय मिश्र, प्रोत्साहन। केंद्र सरकार ने चारों लेबर कोड, जिन्हें संसद ने पांच साल पहले पारित किया था, को लागू करने की घोषणा की, जो श्रम सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था। इसमें महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, जिनमें गिग वर्कस भी शामिल हैं; सभी कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से नियुक्ति पत्र देना; और कांट्रैक्ट कर्मचारियों को स्थाई कर्मचारियों की तरह सुविधाएं देना। इतना ही नहीं, कर्मचारी को पांच साल की न्यूनतम नौकरी की आवश्यकता नहीं रहेगी; इसके बजाय, एक साल की नौकरी के बाद ही वे ग्रेच्यूटी का लाभ पा सकेंगे। लेबर कोड में श्रमिकों और कंपनियों दोनों के लिए कई सुधार हैं, जैसे अतिरिक्त समय भुगतान के नियम।
भविष्य के लिए तैयार वर्कफोर्स के लिए एक आधुनिक ढांचा: इसके तहत सभी क्षेत्रों के कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन के अलावा अतिरिक्त काम के घंटों के लिए दोगुना भुगतान मिलेगा। इन सुधारों में एकमात्र रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस और रिटर्न प्रणाली, नाइट-शिफ्ट में काम की अनुमति, ४० वर्ष से अधिक उम्र के हर कर्मचारी की सालाना मुफ्त अनिवार्य चिकित्सा जांच शामिल हैं। अमेरिका में जारी टैरिफ युद्ध की आर्थिक चुनौतियों के बीच सरकार ने श्रम सुधारों पर साहसिक कदम उठाने का निर्णय लिया है, लेबर कोड लागू करने में कई राज्यों और श्रम संगठनों के लंबे समय से विरोध के कारण।
नए लेबर कोड के अस्तित्व में आने के बाद, निश्चित रूप से श्रम सुधारों की वकालत करने वाली कंपनियां अपने निवेश में काफी वृद्धि करेंगे।
ये लागू किए गए हैं।
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मजदूरीकोड (2019)
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व्यापारसंबंध कोड (2020)
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सोशलसुरक्षा कोड (2020)
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ऑक्यूपेशनलसुरक्षा, स्वास्थ्य और कामकाज (OSHWC) कोड (2020)

